एक बड़े से हवेली में एक दिन रंगीनी नामक लड़की रहने आई। हवेली का माहौल कुछ अजीब था, लेकिन रंगीनी को उससे कोई फर्क नहीं पड़ता था। एक रात, वह हवेली के पुराने कमरे में सो रही थी।
अचानक, एक चुटकुला सुनाई दी, और कोई हँसी की आवाज सुनाई दी। रंगीनी डर के मारे बेहोश हो गई। जब उसने आँखें खोलीं, तो देखा कि एक हँसता हुआ भूत उसके सामने था।
भूत: "तुम्हारी तो तबियत ही अच्छी नहीं लग रही है!"
रंगीनी (हुआरीते में): "तुम भूत हो, और तुम्हें तबियत का पता है?"
भूत: "हां, मेरी तबियत बहुत ही खराब है, मैं हमेशा हँसता रहता हूँ ताकि मैं भूत हूँ, लेकिन कोई मुझसे डरता नहीं है।"
रंगीनी ने हँसते हुए कहा: "आपका हँसना सचमुच भूतिया है, पर मैं नहीं डरूंगी।"
भूत: "आप जो कहेंगी, वही सही!"
इसके बाद, रंगीनी और भूत ने मिलकर एक-दूसरे को अजीब-सी हंसीखेल के लिए बुलाया और वहां से हवेली में हंसी की आवाजें गूंथने लगीं। उनकी मस्ती ने हवेली को एक नए रूप में सजाया और सभी को हंसी में डाल दिया।
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