" बाबू भैया की टॉप 10 की रेस" कोचिंग सेंटर का माहौल हमेशा से ही कुछ खास था। कभी किसी ने पढ़ाई के लिए यहां का रुख नहीं किया था, बल्कि ये जगह असली 'तफरी' का केंद्र बन चुकी थी। सूर्या और कमलेश, दो दोस्त, जो हमेशा एक-दूसरे की टांग खींचने में माहिर थे, अक्सर यहां मिलते और कुछ न कुछ बहाना ढूंढते ताकि पढ़ाई की बात छेड़ी जा सके, फिर उसी पर मजाक किया जा सके। एक दिन सूर्या, जो हमेशा से ही खुद को ज्ञान का पिटारा समझता था, कमलेश से ठहाके मारते हुए बोला, "यार कमलेश, पढ़ाई तो की नहीं, और कोचिंग आ गया। तुझे क्या लगता है, यहां आकर क्या तेरा भविष्य सुधर जाएगा?" कमलेश, जो हमेशा अपने जवाब से सबको चौंका देता था, आंखें चौड़ी करते हुए बोला, "क्यों, क्या बोल रहा है तू? मैं पढ़ता नहीं हूं? एक बार तू मेरे साथ 11वीं में होता तो देखता, कैसे मैं टॉप 10 में आता था। 80 बच्चों के बीच में भी सब मेरी मिसाल देते थे।" सूर्या, जिसे कमलेश की हर बात पर शक रहता था, मजाकिया अंदाज में बोला, "तू और टॉप 10? भाई, मुझे नहीं लगता कि तू क्लास के टॉप 50 में भी होगा। तू ऐसे ही हांक रहा है।...