"बाबू भैया की टॉप 10 की रेस"
एक दिन सूर्या, जो हमेशा से ही खुद को ज्ञान का पिटारा समझता था, कमलेश से ठहाके मारते हुए बोला, "यार कमलेश, पढ़ाई तो की नहीं, और कोचिंग आ गया। तुझे क्या लगता है, यहां आकर क्या तेरा भविष्य सुधर जाएगा?"
कमलेश, जो हमेशा अपने जवाब से सबको चौंका देता था, आंखें चौड़ी करते हुए बोला, "क्यों, क्या बोल रहा है तू? मैं पढ़ता नहीं हूं? एक बार तू मेरे साथ 11वीं में होता तो देखता, कैसे मैं टॉप 10 में आता था। 80 बच्चों के बीच में भी सब मेरी मिसाल देते थे।"
सूर्या, जिसे कमलेश की हर बात पर शक रहता था, मजाकिया अंदाज में बोला, "तू और टॉप 10? भाई, मुझे नहीं लगता कि तू क्लास के टॉप 50 में भी होगा। तू ऐसे ही हांक रहा है।"
कमलेश ने बिना कुछ कहे अपना फोन निकाला, और उसके रिजल्ट्स दिखा दिए। सूर्या, जो हमेशा कमलेश को हल्के में लेता था, अब उसकी तरफ हैरानी से देख रहा था। "अरे भाई, ये तो सच्ची में टॉप 10 में था!" उसकी आंखें खुली की खुली रह गईं।
"अब समझ आया?" कमलेश ने अपने बालों में हाथ फेरते हुए घमंड से कहा। "तू तो मुझसे पूछे बिना ही सोच लिया था कि मैं फालतू हूं।"
सूर्या ने खुद को संभालते हुए फिर से चुटकी ली, "अरे भाई, वो सब ठीक है, पर अब तेरे मार्क्स क्यों नहीं आते? क्या बजह है, ‘बाबू भैया’?"
कमलेश ने एक गहरी सांस ली और मुस्कुराते हुए बोला, "लड़की का चक्कर, बाबू भैया।"
सूर्या ने ठहाका लगाया, "अरे भाई, ये तो मैं समझ गया था! अब ये बता, वो कौन है?"
कमलेश ने थोड़ी सी गंभीरता लाते हुए कहा, "अरे, ये कोई एक नहीं है। मेरी पूरी जिंदगी ही 'लड़की का चक्कर' बन चुकी है। एक के बाद एक, और मार्क्स ऐसे गुम हो जाते हैं जैसे कोई भूत खा गया हो।"
सूर्या ने हंसते-हंसते कहा, "तो भाई, तू पढ़ाई छोड़, रोमांस का कोर्स जॉइन कर ले। उसमें शायद तू टॉप 10 में वापस आ जाएगा।"
कमलेश ने सिर हिलाते हुए कहा, "अरे, रोमांस से भी कुछ नहीं होता। असल में लड़कियों का चक्कर छोड़ने की जरूरत है, पर ये चक्कर ऐसा है, भाई, निकलता ही नहीं!"
अब सूर्या को एक और चुटकी लेने का मौका मिल गया। "अरे तो क्या किया जाए? तुझे तो हर बार नए बहाने मिल जाते हैं।"
कमलेश ने सिर खुजलाते हुए कहा, "भाई, इस बार बहाना नहीं है। जब से मैं उसे देखता हूं, मुझे लगता है कि पढ़ाई की कोई जरूरत ही नहीं है। पूरा दिन उसके ख्यालों में खोया रहता हूं। लगता है कि किताबों में वो ही छुपी हुई है!"
सूर्या ठहाका मारते हुए बोला, "अरे भाई, ये इश्क का बुखार तो बड़ा ही तेज है! पर सुन, ये 'लड़की का चक्कर' कब तक चलेगा? या फिर तू ये चक्कर ही काटता रहेगा?"
कमलेश ने एक गहरी आवाज में कहा, "भाई, सच कहूं? ये चक्कर ऐसा है कि न खत्म होता है, न शुरू होता है। ये लाइफ का हिस्सा बन चुका है। लेकिन अब मुझे समझ आ गया है कि ये चक्कर सिर्फ मेरी सोच का हिस्सा है। असल में मुझे पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए, वरना मैं टॉप 10 क्या, टॉप 1000 में भी नहीं रह पाऊंगा!"
सूर्या ने गंभीर होते हुए कहा, "देख भाई, मजाक की बात छोड़, अब तू सही रास्ते पर आ रहा है। ये लड़ाई सिर्फ तेरी नहीं, हर लड़के की है। पर जो बंदा खुद को समझता है, वही इस चक्कर से निकल पाता है।"
कमलेश ने अपने बाल पीछे करते हुए कहा, "बात तो तू सही कह रहा है, पर लड़की का चक्कर ऐसा होता है, जैसे मैग्नेट। एक बार चिपक गया, तो फिर छोड़ने का मन ही नहीं करता।"
सूर्या हंसते हुए बोला, "अरे भाई, तू खुद को आईरन मैन समझ रहा है क्या? जो भी हो, अब ये मैग्नेट का चक्कर छोड़ और पढ़ाई पर फोकस कर।"
कमलेश ने एक ठहाका मारते हुए कहा, "भाई, अब समझ गया हूं कि असली लड़ाई मार्क्स की नहीं, अपनी खुद की सोच से है। अब लड़ाई लड़ूंगा और जीतूंगा भी। लड़कियों के चक्कर छोड़कर, मैं फिर से वही टॉप 10 वाला कमलेश बनूंगा!"
सूर्या ने उसकी पीठ थपथपाई और मजाकिया अंदाज में बोला, "चल भाई, कम से कम तूने मान लिया कि तू 'लड़की का चक्कर' में था। अब देखता हूं, अगले टेस्ट में तेरे मार्क्स कैसे आते हैं!"
कमलेश ने जोश में आते हुए कहा, "अब तू देख, अगली बार मैं फिर से टॉप 10 में रहूंगा। और इस बार बिना किसी 'लड़की का चक्कर' के!"
दोनों दोस्त हंसते हुए कोचिंग से बाहर निकल गए, और कमलेश ने फैसला कर लिया कि अब उसका ध्यान सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई पर रहेगा... हालांकि, जब तक अगली 'लड़की का चक्कर' न शुरू हो जाए!
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