"फैन गिरा, हंगामा हुआ"
शाम का समय था, माता-पिता बाजार जाने की तैयारी कर रहे थे। जाते-जाते उन्होंने अपनी 13 साल की बड़ी बेटी, प्रिया, को समझाते हुए कहा, “बेटा, कोई भी आए तो बोल देना कि मम्मी-पापा घर पर नहीं हैं और दरवाजा अंदर से मत खोलना। हम थोड़ी देर में आ जाएंगे।” ये कहकर दोनों चले गए और प्रिया और उसका 10 साल का भाई, संजू, घर पर अकेले रह गए।
माता-पिता के जाते ही दोनों भाई-बहन के बीच वही पुरानी लड़ाई शुरू हो गई। संजू ने प्रिया की किसी पुरानी गलती को याद दिला दिया, तो प्रिया ने जवाबी हमला करते हुए कहा, “तू तो हमेशा मम्मी के लाडले बनता है, तुझे तो कुछ आता ही नहीं!” बस, फिर क्या था, दोनों में बहस इतनी बढ़ गई कि कुशन फेंके जाने लगे और चीखने-चिल्लाने की आवाजें पूरे घर में गूंजने लगीं।
कुछ देर लड़ने के बाद दोनों थक गए और अपने-अपने कमरों में चले गए। प्रिया ने सोचा, “चलो, थोड़ी शांति तो मिली।” लेकिन कुछ ही देर में संजू के कमरे से जोरदार आवाज आई। प्रिया घबरा गई और दौड़ती हुई भाई के कमरे में गई। वहां जाकर उसने देखा कि पंखा टूटकर गिरा हुआ है और संजू पंखे के नीचे लेटा हुआ है। प्रिया के होश उड़ गए। उसे लगा कि उसका भाई मर गया है!
घबराई हुई प्रिया दौड़कर बालकनी में गई और जोर-जोर से चिल्लाने लगी, “संजू मर गया! संजू मर गया!” उसकी आवाज सुनकर नीचे सड़क पर चल रहे लोग रुक गए। कुछ लोग उसे देखकर ऊपर आने लगे। वे प्रिया से बोले, “बेटा, दरवाजा खोलो, हम तुम्हारे भाई को अस्पताल ले जाएंगे।”
लेकिन प्रिया ने मम्मी की बात याद करते हुए कहा, “मम्मी ने कहा था, मैं दरवाजा नहीं खोलूंगी।” नीचे भीड़ जमा हो गई। लोग समझाने लगे, “बेटा, दरवाजा खोलो, हम मदद करेंगे।” लेकिन प्रिया जिद पर अड़ी रही।
उधर, पड़ोसी भी शोर सुनकर बाहर आ गए। एक पड़ोसी ने फौरन प्रिया के पापा को फोन लगाया, “जल्दी से घर आओ, तुम्हारा बेटा मर गया है!”
पापा और मम्मी बाजार में थे जब यह खबर मिली। पापा की घबराहट बढ़ गई, वो हड़बड़ी में बोले, “हम अभी आते हैं!”
कुछ ही मिनटों में मम्मी-पापा घर पहुंचे और दौड़ते हुए ऊपर गए। उन्होंने दरवाजा खोला और अंदर भागे। जैसे ही पापा संजू के पास पहुंचे, उन्होंने देखा कि संजू तो आराम से सो रहा था, और पंखा बस उसके बगल में गिरा था! मम्मी ने संजू को हल्के से जगाया, “बेटा, उठो, तुम ठीक हो?”
संजू ने नींद में कहा, “क्या हुआ मम्मी? मैं तो बस सो रहा था!”
यह सुनते ही सबकी जान में जान आई। पापा ने हंसते हुए कहा, “अरे, ये तो ज़िंदा है, बस सो गया था पंखे के नीचे!”
प्रिया के चेहरे पर भी हल्की मुस्कान आ गई। उसे समझ में आया कि वह बेवजह घबरा गई थी। मम्मी ने प्रिया को प्यार से कहा, “देखा, बेटा, घबराहट में कितना बड़ा हंगामा हो गया। अब सब ठीक है।”
और फिर पूरे घर में हंसी की फुहार छा गई। नीचे जमा भीड़ को भी समझ आ गया कि सब ठीक है, और लोग हंसते-हंसते अपने घर लौट गए।
मम्मी ने प्यार से प्रिया और संजू को गले लगाया, “चलो, अब बाजार से कुछ मिठाई ले आए हैं, साथ में बैठकर खाते हैं।”
उस दिन के बाद से प्रिया और संजू की लड़ाइयाँ थोड़ी कम हो गईं, क्योंकि उन्हें समझ आ गया था कि ज़रूरत से ज़्यादा लड़ाई कभी-कभी मजेदार घटनाओं में बदल सकती है!
अंत भला, तो सब भला!
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